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आचार,अनुशासन एवं अपील नियम
 

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बीएचईएल निष्‍पादन 2009-10 ग्‍लोबल कॅम्‍पैक्‍ट सिद्धांत

मानव अधिकार

  1. व्‍यवसाय अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर घोषित मानव अधिकारों की रक्षा का समर्थन तथा आदर करें।

बीएचईएल की नीतियां मानव अधिकारों, भारत के संविधान, श्रम कानूनों आदि को ध्‍यान में रखकर बारीकी से बनाई जाती हैं और उनका अनुसरण किया जाता है।

बीएचईएल में कार्यस्‍थल पर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान बनाए गए हैं।

कर्मचारियों पर लागू- बीएचईएल आचार, अनुशासन एवं अपील नियमों में प्राकृतिक न्‍याय के सिद्धांतों को शामिल किया गया है।

  1. सुनिश्चित किया जाए ये कि मानव अधिकारों का दुरूपयोग नहीं करती है।
कंपनी में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है,जहां पर किसी भी रूप में मानव अधिकारों का दुरूपयोग किया गया हो।

और सूचनाएं

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ का ग्‍लोबल कॅम्‍पैक्‍ट कार्यक्रम
बीएचईएल की प्रतिबद्धता
प्रगति पर बीएचईएल की सूचना
यूएनजीसी
स्‍वास्‍थ्‍य, संरक्षा एवं पर्यावरण नीति
पर्यावरणानुकूल अपारम्‍परिक उर्जा संसाधन उत्‍पाद
प्रदूषण नियंत्रण अनुसंधान संस्‍थान
कृपया सम्‍पर्क करें
सॉफ्टवेयर डाउनलोड
अडोबी एक्रोबैट रीडर
   

श्रम मानदंड

  1.  व्‍यवसाय एसोसिएशन की स्‍वतंत्रता तथा सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार की प्रभावी मान्‍यता को माने

भारत सरकार ने कामगार श्रेणी के हितों की सुरक्षा के लिए पर्याप्‍त रूप से कई श्रम कानून बनाए हैं। बीएचईएल में इन कानूनों का सख्‍ती से पालन किया जाता है। बीएचईएल इकाइयों के सभी प्रमुख विभिन्‍न कानूनों के अनुपालन के बारे में एक रिपोर्ट भेजते हैं। ऐसा कामगारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है ।

इसके अलावा, बीएचईएल में कामगारों के लिए विभिन्‍न द्विपक्षीय मंच भी हैं, जहां पर कामगारों से संबंधित मुद्दों/समस्‍याओं पर विचार-विमर्श करके उनका निपटान किया जाता है। बीएचईएल में एक उच्‍च स्‍तरीय द्विपक्षीय मंच भी है, जिसमें बीएचईएल की सभी इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केंद्रीय श्रमिक यूनियन संगठन के प्रतिनिधि भी होते हैं, जिनसे यूनियनें संबद्ध होती हैं, जो कामगार पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करती है और प्रबंधन का प्रतिनिधित्‍व अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा कार्यात्‍मक निदेशकों के अलावा इकाई प्रमुख करते हैं।

सभी कर्मचारियों का वेतन संशोधन जो 1.1.2007 से देय था, उसे वर्ष के दौरान पूरा किया और वेतन संशोधन के फलस्‍वरूप उचित परामर्शी प्रक्रिया के बाद सभी कर्मचारियों को भुगतान कर दिया गया है।

इसके अलावा संगठनात्‍मक उत्‍कृष्‍टता, सुपरवाइजरों की भूमिका पर दो दिन की एक कार्यशाला आयोजित की। सुपरवाइजरी एसोसिएशन के सदस्‍यों को कंपनी के सम्‍मुख उपस्थित चुनौतियों के बारे में जानकारी देने के साथ इन चुनौतियों से निपटने में सुपरवाइजरों की भूमिका के बारे में भी बनाया गया। इस कार्यशाला में चुनौतियों का सामना करने और ग्राहक प्रतिबद्धता को पूरी करने के लिए रणनीति बनाने पर बल दिया गया। सदस्‍यों से बहुत ही अच्‍छी प्रतिक्रिया प्राप्‍त हुई। सुपरवाइजरों को शामिल करते हुए सिंडिकेट ग्रुप बनाए गए और कार्यशाला के दौरान प्राप्‍त सुझावों को बीएचईएल की विभिन्‍न इकाइयों/प्रभागों को विभिन्‍न स्‍तरों पर इसके बारे में बताने तथा इन्‍हें कार्यान्वित करने के लिए भेजा गया है।

बीएचईएल ने 2004, 2006, 2008 में कार्यशाला के रूप में संयुक्‍त समिति के तीन विशेष सत्र आयोजित किए। इन कार्यशालाओं का विषय निम्‍न रहा:

  • संगठनात्‍मक प्रभावशीलता में वृद्धि
  • उत्‍कृष्‍टता प्राप्ति की योजना
  • कर्मचारियों की प्रभावशीलता बढ़ाना और व्‍यावसायिक चुनौतियों का सामना करना।

विभिन्‍न विषयों जैसे प्रतिभागिता मंच को सशक्‍त करना, संयुक्‍त समिति की चर्चा को संयंत्र स्‍तर तक पहुंचाना, बहु-कौशल, कार्य में परिवर्तन, महत्‍वपूर्ण मशीनों का प्रभावी उपयोग, कर्मचारी और मशीन के उत्‍पादकारी समय में वृद्धि, छीजन तथा रिवर्स में कमी, मशीनों का रख-रखाव और साफ-सफाई, तीन पालियों में कार्य, कर्मचारियों की उत्‍पादकता में वृद्धि, कंपनी सूचना का प्रचार-प्रसार, कार्यस्‍थल पर लागत में कमी के उपाय और दुरूपयोग पर नियंत्रण, गुणता में सुधार और कर्मचारियों के बीच गुणवत्‍ता की भावना बढ़ाना समय चक्र में कमी और इकाइयों को क्रमिक आपूर्ति पर सिंडीकेट समूह बनाए गए हैं। अगस्‍त, 2009 में आयोजित संयुक्‍त समिति की बैठक में विभिन्‍न कार्यशालाओं के दौरान विभिन्‍न सिंडीकेट समूहों द्वारा दिए सुझावों/अनुशंसाओं को संकलित करके एक पुस्‍तक जारी की गई। इकाई स्‍तर पर " उत्‍पादन और उत्‍पादकता में सुधार " विषय पर आयोजित की गई, जिसमें सभी स्‍तरों के कर्मचारियों ने भाग लिया। उन्‍होंने लागत में कमी, उत्‍पादन लक्ष्‍यों की प्राप्ति, क्रमिक सुपुर्दगी और माल की गुणवत्‍ता पर अपने सुझाव दिए। कार्यशाला में सभी संवर्गों की भागीदारी से इकाई की कार्यशीलता सकारात्‍मक प्रभाव पड़ा है।

  1. सभी प्रकार की बेगारी एवं बंधुआ मजदूरी का उन्‍मूलन

कंपनी बेगारी और बंधुआ मजदूरी नहीं कराती है और न ही अपने कर्मचारियों से उनके अपने शैक्षिक या जन्‍मतिथि से संबंधित मूल दस्‍तावेज जमा नहीं कराती है।

  1. बाल श्रम का प्रभावी उन्‍मूलन

बीएचईएल की भर्ती नीति के अनुसार रोजगार की न्‍यूनतम आयु 18 वर्ष है इससे कम आयु के व्‍यक्ति को बीएचईएल में रोजगार नहीं दिया जाता है। इससे बीएचईएल में बाल श्रम को रोजगार न देना सुनिश्चित किया जाता है। वास्‍तव में बाल श्रम नियोजन के क्षेत्र में बीएचईएल एक ' शून्‍य सह्यता' कंपनी है।

  1. रोजगार तथा व्‍यवसाय में भेदभाव का उन्‍मूलन

बीएचईएल की 'कार्मिक नीति' में एक समान नियमों का उल्‍लेख है, जो लिंग, जाति, धर्म, नस्‍ल आदि के होते हुए सभी कर्मचारियों पर एकसमान रूप से लागू होते हैं। सभी भर्तियां खुले रूप में होती हैं और बिना किसी भेदभाव के भारत के सभी नागरिकों को समान अवसर दिए जाते हैं।

 पर्यावरण

  1. व्‍यवसाय समूह पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति एक एहतियाती दृष्टिकोण का समर्थन करें

बीएचईएल की स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा एवं पर्यावरण नीति व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा के अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों (ओएचएएसएएस-18000) तथा पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ-14000) के अनुरूप बनाई गई है। बीएचईएल की सभी इकाइयों/क्षेत्रों सहित, नई दिल्‍ली में स्थित उद्योग क्षेत्र कार्यालय काम्‍प्‍लेक्‍स तथा भोपाल इकाई का एक अस्‍पताल तथा नई दिल्‍ली के समीप (नोएडा) स्थित बीएचईएल टाउनशिप इन मानकों के अनुसार प्रमाणित हैं, जिनका कड़ा आर्डर अंतर्राष्‍ट्रीय प्रणाली एजेंसी द्वारा किया गया। वर्ष के दौरान बीएचईएल की कई इकाइयों/क्षेत्रों में इन प्रणालियों के पुन:प्रमाणन की प्रक्रिया जारी रही। इन इन परियोजनाओं से प्रदूषण रहित पर्यावरण को बनाने, ऊर्जा, जल, ईंधन तेल कूलेट, लुब्रिकेटिंग जैसे मूल्‍यवान संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ रसायन अपशिष्‍ट के भंडारण/हैंडलिंग आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग में सहायता मिली है। वर्ष के दौरान जो प्रमुख पर्यावरणीय सुधार परियोजनाएं पूरी की गई हैं, उनमें शामिल हैं:

कंपनी के सभी संयंत्रों एवं टाउनशिप में भूमिगत जल की गुणवत्‍ता में सुधार लाने और पानी की हर बूंद का संरक्षण करने के लिए अतिरिक्‍त वर्षा जल संग्रहण प्रणाली लगाई गई है।

  • देश भर में स्थित कंपनी के संयंत्रों/टाउनशिपों में कई वृक्षारोपण अभियान चलाए गए, जिसमें कर्मचारी तथा आसपास के समुदाय शामिल थे जिसके फलस्‍वरूप अभी तक कुल 03 मिलियन पेड़ लगाए जा चुके हैं।
  • प्राकृतिक संसाधनों की बचत करना, कचरे से ऊर्जा पैदा करना और कुशल जल प्रबंधन करना।
  1. अधिक पर्यावरणीय जिम्‍मेदारी को बढ़ाने की पहल करना

समाज के प्रति वचनबद्धता के हिस्‍से के रूप में तथा एक जिम्‍मेदार कॉर्पोरेट नागरिक होने के नाते, बीएचईएल देश के विभिन्‍न भागों में सामुदायिक विकास कार्यक्रमों को शुरू करने में शामिल है। बीएचईएल की वर्तमान सीएसआर योजना ( कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्‍व) में 8 महत्‍वपूर्ण क्षेत्र हैं। इन महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों की परियोजनाएं सामान्‍यतया हमारी विनिर्माण इकाइयों, साइटों और उन स्‍थानों पर हैं, जहां पर बीएचईएल की उपस्थिति है:-

  1. स्‍व रोजगार सृजन
  2. पर्यावरण
  3. सामुदायिक विकास
  4. शिक्षा
  5. स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन एवं चिकित्‍सा सहायता
  6. अनाथालय एवं वृद्धाश्रम
  7. बुनियादी विकास
  8. आपदा/बिजली प्रबंधन

पिछले वर्ष की परियोजनाओं में स्‍कूलों को अपग्रेड करना और स्‍कूलों में पेय जल की सुविधाएं, टॉयलेट, स्‍कूल फर्नीचर और छात्रों को स्‍टेशनरी और वर्दी जैसी अनिवार्य सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। गांवों में पक्‍की सड़क बनाई गई और टयूब वैल लगाए गए हैं। उत्‍तर प्रदेश, मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीसगढ़, बिहार और उड़ीसा के दूरस्‍थ जनजाति के क्षेत्रों के बच्‍चों की शिक्षा एवं व्‍यक्तित्‍व विकास की जरूरत के लिए कंप्‍यूटर शिक्षा केन्‍द्र खोला गया है।

स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन एवं चिकित्‍सा सहायता के क्षेत्र में चिकित्‍सा शिविर विशेष रूप से परियोजना साइटों के आसपास के गांवों/समुदायों में लगाए गए मुफ्त स्‍वास्‍थ्‍य जांग के अलावा मुफ्त दवाइयां भी बांटी गईं। आंखों का शिविर का विशेष रूप से उल्‍लेखनीय हैं, जिनमें मुफ्त चश्‍मे बांटे गए और मोतिया बिंद के आपरेशन किए गए। टीबी और एडस और स्‍वास्‍थ्‍य पर विभिन्‍न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए और 10,000 लोगों की आबादी वाले क्षेत्रों में रक्‍त भंडारण सुविधा और प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र स्‍थापित किए गए हैं।

हर वर्ष स्‍व-रोजगार सृजन से संबंधित परियोजनाएं हर वर्ष शुरू की जाती है, जिनमें महिलाओं तथा युवाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए कतिपय विषयों में प्रशिक्षण दिया जाता है और स्‍थानों पर उपकरणों का विवरण भी किया गया है। उदाहरण के लिए तिरूचिरापल्‍ली के निकटवर्ती गांवों में गरीब समुदाय की बेरोजगार महिलाओं को सिलाई और ड्रेस मेकिंग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाली हर महिला को सिलाई मशीन भी दी गई।

बीएचईएल, सरकारी संस्‍थानों में प्रोफेशनल डिग्री कोर्सों में पढ़‌ रहे गरीब बच्‍चों को छात्रवृत्ति भी देता है। विभिन्‍न गांवों में स्थित सरकारी स्‍कूलों में नियमित आधार पर बेंच एवं डेस्‍क भी दिए जाते हैं। बाढ़ आदि जैसे विषय के समय समुदायों को तात्‍कालिक सहायता दी जाती है। निदेशक मंडल ने कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में बाढ़ सहायता के लिए 10 करोड़ रूपए की राशि स्‍वीकृत की है। आवश्‍यकता के आधार पर हर वर्ष परियोजनाएं शुरू की जाती हैं और उन्‍हें वर्ष की 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाता है।

बीएचईएल की सीएसआर नीति की समीक्षा भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केन्‍द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सीएसआर पर हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार की जा रही है और इसे उसके अनुरूप बनाया जा रहा है।

बीएचईएल अपनी सभी गतिविधियों, उत्‍पादों एवं सेवाओं में पर्यावरण अनुकूल कंपनी है और आपने सभी स्‍टेकहोल्‍डरों को सुरक्षित एवं स्‍वास्‍थ्‍यपरक पर्यावरण प्रदान कर रही है। महत्‍वपूर्ण रूप से बीएचईएल ने प्रभावी रूप से ग्रीन हाउस गैस उज्‍सर्जन कम करने के लिए स्‍वच्‍छ विकास तंत्र ( सीडीएम) पर परियोजनाएं शुरू करने की पहल की है और इस क्षेत्र में लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए कड़े प्रयास किए जा रहे हैं। आंतरिक कार्यान्‍वयन एवं ग्राहकों के साथ मिलकर सीडीएम गतिविधि परियोजनाओं की एक व्‍यापक संदर्भ सूची बनाई गई है। सीडीएम प्रत्‍येक इकाई के लिए एक योजनाबद्ध गतिविधि है और कार्बन क्रेडिट बजटीय गतिविधि का एक हिस्‍सा भी है। समाज और पर्यावरण के लिए बीएचईएल के सरोकार के अनुरूप 100-140 मेगावाट अनुप्रयोग के लिए अधिक ऊर्जा कुशल सिंगल कुशल सिलिंडर नॉन-रिहीट स्‍टीम टरबाइन का विकास किया गया है। यह उन संयंत्रों के लिए उपयुक्‍त है, जहां पर वेस्‍टहीट अधिक मात्रा में उपलब्‍ध होती है और रिहीट का विकल्‍प संभव नहीं होता है। बीएचईएल द्वारा अभी तक बनाई गई सबसे अधिक क्षमता की सिंगल सिलिडेंर स्‍टीम टरबाइन पर्यावरण के प्रति अपने सरोकार के अनुरूप बीएचईएल संधारणीय आधार पर अक्षय ऊर्जा आधारित उत्‍पादों का विकास करने और उन्‍हें लोकप्रिय बनाने के राष्‍ट्रीय प्रयास में अपना योगदान दे रहा है। वर्ष के दौरान जवाहरलाल नेहरू सौर मिशन में अपने योगदान के रूप में बीएचईएल कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लि.( केपीसीएल) के लिए टर्नकी आधार पर पर्यावरणनुकूल 2 मेगावाट और 2 ग्रिड इंटरएक्टिव सोलर फोटोवोल्‍टईक ( एसपीवी) विद्युत संयंत्र के लिए बीएचईएल द्वारा प्राप्‍त यह पहला ऑर्डर है।

लक्षद्वीप समूह को हरा-भरा रखने के लिए बीएचईएल के योगदान के मान्‍यता सदस्‍य बीएचईएल के इंडियन पावर-जूरी अवार्ड 2009 प्रदान किया गया है। बीएचईएल ने 12 स्‍थानों पर 1065 किलोवाट के सोलर फोटोवोल्‍टेईक ग्रिड इंटरएक्टिव और स्‍टैंड-एलोन संयंत्र स्‍थापित किए गए हैं, जिससे इन दूरवर्ती द्वीपों की प्राकृतिक क्रास को अक्षुण्‍ण बनाए रखने में योगदान मिला। बीएचईएल हैदराबाद इकाई को सीआईआई का एक्‍सीलेंस इन एनर्जी मैनेजमेंट 2009 राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिला। यह इकाई पिछले 3 वर्षों से प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार जीतती रही है। संधारणीय विकास पर उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन के लिए सीआईआई-आईटीसी स्‍टेनेबिल्‍टी अवार्ड, 2009 भी बीएचईएल की हैदराबाद इकाई को प्रदान किया गया। यह पुरस्‍कार बीएचईएल हैदराबाद इकाई की संधारणीयता(sustainability के तीन मानदंडों यथा-पर्यावरण, सामाजिक एवं आर्थिक मानदंडों पर यह पुरस्‍कार बीएचईएल को उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन के लिए मान्‍यता प्रदान करता है।

जी-एसएटी,4 सैटेलाइट में लगाने के लिए भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) के मिलकर उच्‍च विद्युत अनुप्रयोगों के लिए हाई वोल्‍टेज 70वी स्‍पेस-ग्रेड सोलर सैल पैनलों का विकास किया गया है। महत्‍वपूर्ण रूप से इसरो द्वारा छोड़े गए 12 सैटोलाइटों में बीएचईएल द्वारा निर्मित सौर पैनल और 7 सैटेलाइटों में बीएचईएल द्वारा निर्मित बैटरियां लगी हुई थीं। 2 मेगावाट एवं 1 मेगावाट के दो पर्यानुकूल ग्रिड इंटरएक्टिव एसपीवी विद्युत संयंत्र टर्नकी आधार पर केपीसीएल के लिए कर्नाटक में लगाए जा रहे हैं। एसपीवी माडयूल्‍स की वार्षिक निर्माण क्षमता 3 मेगावाट से बढ़ाकर 8 मेगावाट कर दी गई है।

सोलर पीवी प्रणाली की लागत कम करने के सतत प्रयासों में बीएचईएल ने 156 एमएम आकार की मल्‍टी क्रिस्‍टललाइन सिलीकॉन सोलर सैलों का उपयोग करते हुए सबसे बड़े आकार के 220 वाट पीवी मॉडयूलों का विकास किया है। वर्तमान 156 मि.मी. के स्‍थान पर 156 मि.मी. आकार के सोलर सैलों के उपयोग में उत्‍पादन में लगभग 60% की वृद्धि हुई है। इससे बड़ी कट के माडयूल विशेषकर मेगावाट आकार की ग्रिड कनैक्टिड उपयोगों की ग्राहक मांग पूरी होगी, क्‍योंकि प्रति प्रणाली में अपेक्षित माडयूलों की संख्‍या कम होगी और इससे विश्‍वसनीयता भी बढ़ जाएगी।

बीएचईएल ने आरंभिक ऊर्जा के रणनीतिक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में कई प्रयास किए हैं, जिनमें एक और ऊर्जा की बढ़ती हुई आवश्‍यकताओं की समस्‍या तथा दूसरी ओर तेजी कम होते फॉसिल आधारित ऊर्जा स्रोतों का समाधान है। निर्मित एवं आपूर्त अक्षय उर्जा उत्‍पादों एवं प्रणालियों की शृंखला में कई सोलर वाटर हीटिंग प्रणाली घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग दोनों के लिए एसपीवी प्रणाली तथा पूरे देश में पवन विद्युत जेनरेटर शामिल हैं।

बीएचईएल के पास ग्रिड-कैनेक्टिड एवं हाईब्रिड एसपीवी विद्युत संयंत्रों को लगाने की क्षमता है। बीएचईएल वितरित विद्युत उत्‍पादन के लिए छोटे विद्युत संयंत्रों ( 25 मेगावाट स्‍टेशन क्षमता तक के) की आपूर्ति भी कर रहा है।

कंपनी भावी क्षेत्रों यथा वितरित पर्यावरण अनुकूल विद्युत उत्‍पादन, स्‍वच्‍छ कोयला प्रौद्योगिकी उपयोग, इलेक्‍ट्रॉड निर्माण प्रक्रिया मानकीकरण, सामग्री के गुणों में सुधार लाने के लिए नैनो/माइक्रो कणों में वृद्धि करने की विकास प्रक्रिया, ट्रांसफॉर्मरों, जेनरेटरों/मोटरों में सुपर कंडक्टिविटी उपयोग अनुसंधान में भी कार्यरत हैं।

बीएचईएल ने सोलर फोटो वोल्‍टेईक व्‍यवसाय करने और सिलिकॉन वेफर्स, सोलर सैल और मॉडयूलों के लिए निर्माण सुविधा स्‍थापित करने के लिए मैसर्स भारत इलेक्‍ट्रानिक्‍स लिमिटेड ( बीईएल) के साथ संयुक्‍त उद्यम बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए।

बीएचईएल 'पानी' जैसे अतिमहत्‍वपूर्ण संसाधन का संरक्षण करने के प्रति जागरूक हैं, इसलिए इसने डिसेलिनेशन प्‍लांट सिक्‍ड ( समुद्री जल के लिए उपयुक्‍त) आधारित कैम्‍पट 2.4 टीपीडी ( टन प्रति दिन) रिवर्स ओसमोसिस का विकास किया।

अन्‍य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने के लिए अक्षय ऊर्जा का दोहन करने की प्रतिबद्धता पर बल देने के लिए बीएचईएल ने यूटीलिटी ग्रिड की अनुपस्थिति में अपारम्‍परिक ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन परियोजना शुरू की है। इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए बीएचईएल ने आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले के कदावकल्‍लु में ऊर्जा स्रोतों के रूप में विंड, सोलर फोटोवोल्‍टईक ( एसपीवी) एवं डीजल को इंटीग्रेड करते 100 कि.वा. की हाइब्रिड सिस्‍टम की कमीशनिंग की है। देश में इस प्रकार की प्रौद्योगिकी पहली बार विकसित की गई है, जो विंड जेनरेटर, डीजल जेनरेटर सेटों एवं एसपीवी सिस्‍टम को मिलाकर स्‍टैंड एलोन ग्रिड बनाने का मार्ग प्रशस्‍त करेगी। इस परियोजना के अंतर्गत एक मास्‍टर कंट्रोलर विकसित किया गया है, जो स्‍टैंड एलोन ग्रिड के उपयुक्‍त प्रचालन को सुनिश्चित करेगा, जिसमें डीजल के न्‍यूनतम उपयोग की दृष्टि से पवन एवं सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग होगा।

उर्जा संरक्षण

  1. कुशल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए निम्‍नलिखित ऊर्जा बचत प्रणाली भी शुरू की गई है।
  • उत्‍पादन स्‍थान पर टर्बो विंड वेंटीलेटर लगाया।
  • सोलर वाटर हीटिंग सिस्‍टम एवं सोलन स्‍ट्रीट लाइटिंग जैसे उर्जा के अक्षय स्रोतों का उपयोग।
  • वेल्डिंग रेक्टिफायर्स के लिए एनर्जी सेवर्स को लगाना।
  • पुरानी मोटरों के स्‍थान पर ऊर्जा कुशल मोटरों को लगाना।
  • पुराने अकुशल ट्रांसफार्मरों के स्‍थान पर ऊर्जा कुशल ट्रांसफार्मर लगाना।
  • नई मशीनों को खरीदते समय एसी मोटरों के स्‍थान पर वीएफडी का उपयोग करना।
  • ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली स्‍थापित करना इंडक्टिव लोड के लिए ऑटोमैटिक पावर फैक्‍टर कंट्रोलर लगाना।
  • लाइटिंग फीडर में पावर सेवर लगाना।
भ्रष्‍टाचार- रोधक
  1. व्‍यवसाय को सभी प्रकार के फिरौती रिश्‍वत सहित भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध काम करना चाहिए।

भ्रष्‍टाचार को कम करने के लिए भारत सरकार ने 'सूचना अधिकार' अधिनियम बनाया है, जिसमें सभी सरकारी नियंत्रित संस्‍थानों और सार्वजनिक संगठनों से सूचना प्राप्‍त करने तथा निरीक्षण अधिकार दिया गया है। बीएचईएल ने इस अधिनियम के सभी प्रावधानों का पूरी तरह से पालन करने के लिए मुख्‍य भूमिका निभा रहा है।

इस उद्देश्‍य को पूरा करने के लिए कंपनी में प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार/सम्‍मेलन एवं मुख्‍य सतर्कता अधिकारी का कर्मचारियों को संबोधन एक नियमित कार्य है। कंपनी का मुख्‍य उद्देश्‍य जांच करने/दंड देने के बजाय निवारण एवं शिक्षापरक तत्‍वों पर ध्‍यान देकर भ्रष्‍टाचार को रोकना है।

- भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए पूरी कंपनी में 'पारदर्शी उपाय' शुरू किए गए हैं, जिनमें कुछ इस प्रकार हैं:

  • कंपनी ने ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के साथ 'निष्‍ठा करार' ( इंटिग्रेटी पैक्‍ट) किया है। अभी तक तीन स्‍वतंत्र बाहरी मॉनीटर ( आईईएम) नियुक्‍त किए जा चुके हैं। इसका आशय आचरण के प्रति दोनों पक्षों को बद्ध करके सार्वजनिक खरीद और कांट्रेक्टिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है। इससे सिविल सोसाइटी के लिए मॉनीटर की भूमिका निभाई जा सकेगी, जो अंतिम लाभार्थी हैं।
  • सभी भुगतान इलेक्‍ट्रॉनिक में नीति से किए जाते हैं।
  • विक्रेता पंजीकरण आवेदन, विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया और विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है।
  • सभी टेंडर कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध कराए जाते हैं।
  • खरीद आदेशों तथा किए गए अनुबंधों का विवरण कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है।
  • सभी विक्रेताओं के बिलों का बिल भुगतान स्थिति को लगातार वेब पर अपडेट किया जाता है।

अपने कर्मचारियों के लिए आचरण के उच्‍च मानदंड स्‍थापित करने हेतु कंपनी के प्रयास के रूप में वरिष्‍ठ प्रबंधक कार्मिकों एवं बोर्ड सदस्‍यों के लिए व्‍यवसाय आचार एवं नैतिक संहिता बनाई गई है। इस संहिता में सामान्‍य नैतिक अनिवार्यताएं, विशिष्‍ट प्रोफेशनल दायित्‍व, बोर्ड के सदस्‍यों एवं वरिष्‍ठ प्रबंधक कार्मिकों के लिए अतिरिक्‍त डयूटी/अनिवार्यताएं शामिल की गई है।

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